रज़ा हुसैन क़ादरी
कुशीनगर: जिला के चर्चित जगहों में शुमार एक इलाका़ जंगल शाहपूर रौज़ा है जिसे बूढ़न शाह (सबूढ़न पीर) रहमतुल्लाह अलैह के नाम से जाना जाता है , हर साल उर्स लगता है और लगभग 1 महीने तक यहां ज़ायरीन का आवागमन रहता है, हज़रत की ज़ियारत के लिए दूर-दराज़ से लोग आते हैं और उनको ज़रीआ़ बना कर दुआओं व मिन्नतों की गुहार लगाते हैं। उसी पहल को दोहराते हुए फिर इमसाल 2 दिसम्बर 2025 से हज़रत बूढ़न शाह रहमतुल्लाह अलैह के उर्स का आग़ाज़ हो रहा है, अरबी तारीख़ के मुताबिक 2 दिसम्बर (मंगल) की मग़रिब के बाद 11 वीं तारीख़ हो जाएगी और 3 दिसम्बर 2025 (बुध) को दिन ग़ुरूब होने से पहले तक (ग्यारहवीं शरीफ़) रहेगा,
जिसमें 2 दिसम्बर को :-
(1)- बाद नमाज़े असर कुरआन ख्वानी,
(2)- बाद नमाज़े मग़रिब फातिह़ाख्वानी (कुल शरीफ)
(3)- बाद नमाजे इशा फैज़ाने औलिया कॉन्फ्रेंस का एहतेमाम किया गया है,
(4)- 3 दिसम्बर 2025 को दिन में परम्परागत गागर-चादर के साथ जुलूस निकाला जाएगा।
प्रोग्राम में शुमार इलाक़े के तमाम ओलमा व अइम्मा हज़रात हैं, प्रोग्राम के बाद से ही लंगर का आग़ाज़ होगा जो लगातार 2,3,4 दिसम्बर तक सुबह-शाम चलता रहेगा। ये जानकारी लंगर व प्रोग्राम का इंतजाम करने वाली कमेटी, मौजूदा इमाम (खादिमुल इस्लाम) व मक़ामी लोगों से ली गई है।
