जुम्आ व सनीचर को हज़ारी रोज़ा रखें व जुम्आ की रात में करें इ़बादत

इस्लामी: मुफ्ती रज़ाउल मुस्तफा बरकाती (इमाम: जामा मस्जिद पडरौना) ने शबे मेराज यानि 27 वीं रजब की रात व दिन के बारे में बताया कि ह़दीस शरीफ है ” बैहक़ी ने शुअबुल ईमान में और दैलमी ने मुस्नदुल फ़िरदौस में हज़रत सलमान फ़ारसी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से मरफ़ूअ़न रिवायत किया है…रजब में एक दिन और एक रात है जो उस दिन रोज़ा रखे और उस रात नफ़्ल इबादत में गुज़ारे, तो उसे सौ वर्षों के रोज़ों और सौ वर्षों की रात की इबादत का सवाब मिलता है और वह दिन 27 रजब है। इसी तारीख़ को अल्लाह अज़्ज़ो व जल्ल ने हज़रत मुहम्मद ﷺ को मबऊस फ़रमाया। ” (फ़तावा रज़विया, जिल्द: 8, पृष्ठ: 466)इसी रजब के रोज़े को हम अपनी भाषा में हज़ारी रोज़ा भी कहते हैं।इस साल यह रोज़ा 16-01-2026 व 17-01-2026 दिन जुम्आ व सनीचर को रहेगा। हम मुसलमानों की जिम्मेदारी है कि पहले फ़राईज़ पर ध्यान दें उसके बाद ऐसी इ़बादत व नफ्ली रोज़ा भी रखें जिससे खुदा राज़ी हो , उसकी कुर्बत हासिल हो और हमारे गुनाहों की मग़फिरत अ़ता फरमाए।

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